Saturday, 11 August 2018

नेपाल यात्रा पार्ट - 2

जैसा कि मैंने अपने पहले मेरी नेपाल यात्रा पार्ट -1 बताया कि कैसे आप नेपाल बॉर्डर पर कागजी करवायी को पूरा कर सकते है।

अपने यात्रा के सम्बन्धित कागजी करवाई मैं हमें लगभग एक घंटे का समय लग गया उसके बाद हम महेन्द्रनगर की और चल दिए जो कि चार किमीO है गड्डाचौकी से महेन्द्रनगर पहुंचने पर हमने आर0 टी0 ओ (
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) मे  जाकर अपना रोड टैक्स भरा जो कि नौ दिनों क लिए था (अगर आप पुरे नेपाल मे घूमने का प्लान बना रहे है  तो परमिट पर ऑल  नेपाल  लिखवाना ना  भूले ) और अब हम अपने नेपाल कि यात्रा करने को तैयार थे।

लगभग दिन के दो बजे के आस पास हम कोहलपुर क लिए चले जो की दो सौ किमीO की दुरी पर स्थित है और लगभग चार घंटे का समय लगता है।


महेन्द्रनगर से काठमाण्डू को जाने वाली रोड बहुत अच्छी स्थिति मे है, बहुत कम गड्डे सड़क पर मिलेंगे। रोड पर गाड़ी चलना आरामदायक होता है।

लगभग दो घंटे की सफर करने के बाद  हम चिसापानी जगह पर रुके जो की एक छोटा सा कस्बा है जिसे कर्णाली नदी के किनारे पर बसाया गया है, जिसको पार करने के बाद बर्दिया नेशनल पार्क की सीमा प्रारम्भ हो जाती है।

कर्णाली ब्रिज

एक घण्टा चिसापानी मे ठहरने के बाद हम कोहलपुर के लिए निकल पड़े जो की ७८ किमी0 की दुरी पर है, कर्णाली ब्रिज को पार करने एक बाद हम बर्दिया नेशनल पार्क की सीमा मे प्रवेश कर गये जो की बहुत घना जंगल है।

बर्दिया नेशनल पार्क बर्दिया जिले मे  स्थित है और इस जगह को नेपाली सरकार द्वारा संरक्षित किया गया है सन 1988 मे,ये पार्क नेपाल का सबसे बड़ा पार्क है जो की नेपाल के पश्चिमांचल के तराई वाले भाग पर स्थित है।

बर्दिया नेशनल पार्क में बहुत सी प्रजाति के जंगली जानवर पाए जाते है जिनमे प्रमुख एक सींग वाला गैंडा है जिसे चितवन नेशनल पार्क से यह विस्थापित किया गया है जिनकी संख्या अब बाद रही है, यहा  पर अन्य जानवर भी पाए जाते है जैसे की मगरमच्छ, घड़ियाल, टाइगर, जंगली हाथी और विभिन्न प्रकार की चिड़ियाएं देखने को मिलती है।


हम लोगो को वह की पुलिस ने पहले ही चेतावनी दे राखी थी की हमें कही प भी अपनी वाहन को रोकना नहीं  है, एक निश्चित गति पर अपनी वाहन को चलना है
और उनके द्वारा दी गयी समय पर ही पहुंचना है नहीं तो आपको नेपाल के ट्रैफिक नियम के अनुसार कारवाई हो सकती है।

हम लोग उनके दिए हुए सलाह के अनुसार ही चल रहे थे।

हम लगभग साम के ६ बजे के आस पास कोहलपुर पहुंचे जहा पर मैंने पहले से ही अपने परचित होटल मालिक से  बुकिंग करवा लिया था जो को हमारे  पहले से ही जानने वाले थे।

हम लोग कोहलपुर के एक नामी होटल मे रुक रहे थे होटल सेंट्रल प्लाजा में और इस होटल के मालिक है श्री देवानन्द अर्याल जी, जो बहुत हंसमुख व जिम्मेदार इंसान है।



होटल सेंट्रल प्लाजा कोहलपुर
   कोहलपुर भेरी अंचल के बांके जिला में स्थित है यहां से १६ किमी0 की दूरी पर नेपालगंज स्तिथ है जहा पर एयरपोर्ट है। नेपालगंज से इंडियन सीमा शुरू हो जाती है। कोहलपुर को सेंटर पॉइंट माना जाता है नेपाल मे प्रवेश के लिए।

हम लोगो के पहुंचते ही हमें हमारा कमरा दे दिया गया थोड़ा आराम करने के बाद हम देव अर्याल जी से मिले और उनसे वहा की जानकारी ली।


देवानन्द अर्याल जी

रात्रि भोजन के समय भी हम देव अर्याल जी मिले वहा पर उनका स्वागत सत्कार बहुत ही अच्छा है जो अतिथि एक बार उनसे मिल लेता है वो उनके पास दुबारा जरूर मिलने जाता है।


कैसे जाये


कोहलपुर तराई क्षेत्र में बसा है जो कि प्रवेश द्वार माना जाता है पुरे नेपाल को जाने का।

महेन्द्रनगर से लगभग 200 किमी0 की दुरी पर है। जो की चार घंटे का समय लेती है रोड से।

लखनऊ (भारत ) से भी लगभग 200 किमी0 की दुरी पर है जिन्हे काठमांडू जाना होता है, कोहलपुर से होते हुए जाते है बाय एयर हो या बाय रोड।


कहा ठहरे

वैसे तो कोहलपुर मे बहुत सारे छोटे बड़े होटल, गेस्ट हाउस उपलब्ध है अगर मेरी माने तो एक बार आप होटल सेंट्रल प्लाजा में ज़रूर ठहरे और वहा की अतिथि सत्कार का लुप्त उठाए।


कब जाये
साल के किसी भी समय में यहां जाया जा सकता है लेकिन यह प गर्मी बहुत होती है तो गर्मी में थोड़ा सोचे क्योकि कोहलपुर तराई क्षेत्र में बसा है।


यात्रा आगे भी जारी रहेगी............